शुक्रवार, 15 जुलाई 2016
जरूर पढ़े:एक व्यंग्य ;👌👌👌👌👌👌अक्ल बाटने लगे विधाता,लंबी लगी कतारें ।सभी आदमी खड़े हुए थे.कहीं नहीं थी नारी ।👬👬👬👬👬सभी नारियाँ कहाँ रह गई.था ये अचरज भारी ।पता चला ब्यूटी पार्लर में,पहुँच गई थी सारी।💆💇💅💆💇💅मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,एक एक पर भारी ।बैठी थीं कुछ इंतजार में,कब आएगी बारी ।🙇🙇🙇🙇🙇🙇उधर विधाता ने पुरूषों में,अक्ल बाँट दी सारी ।ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर,जब पहुँची सब नारी ।👭👭👭👭👭बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है,नहीं अक्ल अब बाकी ।रोने लगी सभी महिलाएं ,नींद खुली ब्रह्मा की ।😴😴😴😴😴😴पूछा कैसा शोर हो रहा है,ब्रह्मलोक के द्वारे ?पता चला कि स्टॉक अक्लका,पुरुष ले गए सारे ।👲👳👮👷💂ब्रह्मा जी ने कहा देवियों ,बहुत देर कर दी है ।जितनीभी थी अक्ल वो मैंने,पुरुषों में भर दी है ।🚶🚶🚶🚶🚶🚶लगी चीखने महिलाये ,ये कैसा न्याय तुम्हारा?कुछ भी करो हमें तो चाहिए.आधा भाग हमारा ।😹😹😹😹😹😹पुरुषो में शारीरिक बल है,हम ठहरी अबलाएं ।अक्ल हमारे लिए जरुरी ,निज रक्षा कर पाएं ।💪💪💪💪💪💪सोचकर दाढ़ी सहलाकर ,तब बोले ब्रह्मा जी ।एक वरदान तुम्हे देता हूँ ,अब हो जाओ राजी ।😇😇😇😇😇😇थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी ,रहे पुरुष पर भारी ।कितना भी वह अक्लमंद हो,अक्ल जायेगी मारी ।😸😸😸😸😸😸एक औरत ने तर्क दिया,मुश्किल बहुत होती है।हंसने से ज्यादा महिलाये,जीवन भर रोती है ।😿😿😿😿😿😿ब्रह्मा बोले यही कार्य तब,रोना भी कर देगा ।औरत का रोना भी नर की,अक्ल हर लेगा ! 😫😩😫😩😫😩एक अधेड़ बोली बाबा ,हंसना रोना नहीं आता ।झगड़े में है सिद्धहस्त हम,खूब झगड़ना भाता ।😾👹😾👹😾👹ब्रह्मा बोले चलो मान ली,यह भी बात तुम्हारी ।झगडे के आगे भी नर की,अक्ल जायेगी मारी ।😱😱😱😱😱😱ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से,अंतिम वचन हमारा ।तीन शस्त्र अब तुम्हे दिए.पूरा न्याय हमारा ।👊👊👊👊👊👊इन अचूक शस्त्रों में भी,जो मानव नहीं फंसेगा ।निश्चित समझो,उसका घर नहीं बसेगा ।🙌✋🙌✋🙌✋कहे कवि मित्र ध्यान से,सुन लो बात हमारी ।बिना अक्ल के भी होती है,नर पर नारी भारी।💃💃💃💃💃💃🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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